सोलर प्लांट में छिपा खतरा: मेंटेनेंस की कमी और भरोसे की टूट

सोलर प्लांट में छिपा खतरा: मेंटेनेंस की कमी और भरोसे की टूट

भारत में सोलर एनर्जी को भविष्य की ऊर्जा माना जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग है। देशभर में कई सोलर पावर प्लांट मालिक यह महसूस कर रहे हैं कि उनका निवेश उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दे पा रहा। इसकी दो बड़ी वजहें सामने आ रही हैं—खराब मेंटेनेंस और इंस्टॉलेशन के बाद गायब हो जाने वाली कंपनियां।

सोलर प्लांट को अक्सर “फिट-एंड-फॉरगेट” सिस्टम समझ लिया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि बिना नियमित देखरेख के इसकी परफॉर्मेंस हर साल गिरती जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक सही ऑपरेशन और मेंटेनेंस न होने पर 20 प्रतिशत तक उत्पादन कम हो सकता है।

छोटी लापरवाही, बड़ा नुकसान

धूल से ढके पैनल, समय पर साफ न किए गए मॉड्यूल, खराब अर्थिंग और बार-बार ट्रिप होते इन्वर्टर—ये सभी समस्याएं धीरे-धीरे प्लांट को कमजोर कर देती हैं। चूंकि कई प्लांट्स में मॉनिटरिंग सिस्टम ठीक से काम नहीं करता, इसलिए मालिकों को नुकसान का पता महीनों बाद चलता है।

EPC कंपनियों का गायब हो जाना

सोलर इंडस्ट्री में तेजी के साथ कई नई EPC कंपनियां आईं, लेकिन उनमें से कई केवल इंस्टॉलेशन तक सीमित रहीं। कमीशनिंग के बाद न फोन उठते हैं, न साइट विज़िट होती है।

परिणामस्वरूप:

  • प्लांट लंबे समय तक बंद रहता है

  • वारंटी का लाभ नहीं मिल पाता

  • मरम्मत का खर्च बढ़ता जाता है

  • ROI की अवधि कई साल आगे खिसक जाती है

सही पार्टनर चुनना क्यों जरूरी

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोलर प्लांट की सफलता का आधार केवल पैनल नहीं, बल्कि सही डिजाइन और भरोसेमंद सर्विस नेटवर्क होता है। कम कीमत के लालच में चुनी गई EPC कंपनी आगे चलकर कई गुना नुकसान करा सकती है।

एक अनुभवी इंस्टॉलर लंबे समय तक तकनीकी सपोर्ट, मेंटेनेंस और सिस्टम परफॉर्मेंस सुनिश्चित करता है।

आगे का रास्ता

जैसे-जैसे सोलर सेक्टर बड़ा हो रहा है, प्लांट मालिक अब केवल इंस्टॉलेशन नहीं बल्कि लॉन्ग-टर्म O&M पर भी ध्यान देने लगे हैं। आने वाले समय में वही प्लांट सफल होंगे जिनके पास मजबूत इंस्टॉलेशन और प्रोफेशनल मेंटेनेंस सपोर्ट होगा।

Jetsor Power Systems ने बताया लापरवाही का आर्थिक असर

संवाददाता ने सोलर प्लांट ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी कंपनी Jetsor Power Systems Pvt Ltd के एक प्रतिनिधि से बात की, तो उन्होंने लापरवाही के वित्तीय प्रभाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा।

उन्होंने कहा,
“नियमित और प्रोफेशनल मेंटेनेंस के अभाव में सोलर प्लांट मालिकों को लगातार उत्पादन हानि, इन्वर्टर फेल्योर और प्रमुख कंपोनेंट्स के तेजी से खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में यह नुकसान तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन समय के साथ यह लाखों या करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान में बदल जाता है। भरोसेमंद पार्टनर द्वारा सही इंस्टॉलेशन और निरंतर O&M ही सोलर निवेश को सुरक्षित रख सकता है।”

प्रोफेशनल O&M सेवाओं की बढ़ती जरूरत

चूंकि सोलर प्लांट्स से 20 से 25 साल तक संचालन की उम्मीद की जाती है, इसलिए इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोफेशनल O&M सेवाएं और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

अब प्लांट मालिक ऐसे सर्विस प्रोवाइडर्स की तलाश में हैं जो नियमित निरीक्षण, परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें।

जैसे-जैसे सोलर सेक्टर परिपक्व हो रहा है, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इसकी सफलता केवल क्षमता बढ़ाने से नहीं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन, भरोसेमंद इंस्टॉलर और दीर्घकालिक सर्विस सपोर्ट पर निर्भर करेगी।

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