भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने बुधवार हैदराबाद में कहा कि नए बुनियादी ढांचे का निर्माण न केवल वकीलों और न्यायाधीशों के लिए अच्छा है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापक वर्ग तक पहुंचना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थान अक्सर समाज में पहले से मौजूद सामाजिक असमानताओं को प्रतिबिंबित करते हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यहां नए तेलंगाना उच्च न्यायालय भवन की आधारशिला रखने के बाद अपने संबोधन में यह भी कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण समाज में उन समुदायों और समूहों को मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिन्हें परंपरागत रूप से न्यायिक प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम सभी को याद रखना चाहिए कि सार्वजनिक स्थान अक्सर हमारे समाज में पहले से मौजूद सामाजिक असमानताओं को प्रतिबिंबित करते हैं। हमारा बुनियादी ढांचा कभी-कभी बहिष्कार के सूक्ष्म संकेतों को दर्शाता है, जैसे कि महिलाओं के लिए वॉशरूम की कमी, जिसका मैंने पहले उल्लेख किया था, विकलांगों या अलग-अलग विकलांगों के लिए रैंप , युवा माताओं के लिए क्रेच और स्तनपान कक्ष ऐसे तमाम उदाहरण हैं।
सीजेआई ने कहा कि हालांकि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बाजार है, लेकिन आज भी देश में इंटरनेट-विभाजन है क्योंकि हर किसी के पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है और हर वकील के पास स्मार्टफोन तक पहुंच नहीं है और हर नागरिक के पास लैपटॉप नहीं है।
उन्होंने कहा कि विकलांग-अनुकूल पार्किंग स्थलों की स्पष्ट अनुपस्थिति यह बताती है कि अदालतें विकलांग व्यक्तियों के लिए नहीं हैं या उन्हें न्याय तक पहुंच प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त बाधाओं को पार करना होगा।
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