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Bilkis Bano Case: बिलकिस केस में 11 दोषियों में से तीन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, सरेंडर करने के लिए और समय मांगा

Bilkis Bano Caseबिलकिस बानो केस के 3 दोषियों ने सरेंडर करने के लिए कोर्ट से समय की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत अर्जी दाखिल की है। बता दें कि 2 दोषियों में से एक ने 6 सप्ताह और एक ने 4 सप्ताह का वक्त मांगा है।

बता दें कि उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। इस मामले की सुनवाई 19 जनवरी को होगी। वहीं दोषियों को 21 जनवरी तक सरेंडर करना होगा।

बता दें कि इससे पूर्व 8 जनवरी को इस मामले के 11 दोषियों को सजा में छूट देने के राज्य सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था और दो सप्ताह के अंदर ही दोषियों को जेल भेजने का निर्देश दिया था।

अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए मांगी मोहलत

बिलकिस बानो मामले के दोषियों में शामिल गोविंदभाई नाई, रमेश रूपाभाई चंदना और मितेश चिमनलाल भट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने आत्मसमर्पण का समय बढ़ाए जाने की मांग की है।

गोविंदभाई नाई ने जहां बीमारी का हवाला देते हुए उनकी आत्मसमर्पण का समय 4 हफ्ते बढ़ाए जाने की मांग की है।

वहीं रमेश रूपाभाई चंदना ने बेटे की शादी का हवाला देते हुए, जबकि मितेश चिमनलाल भट ने फसल की सीजन का हवाला देते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए 6 हफ्ते दिए जाने की मांग की है।

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मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया मामला

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की पीठ के सामने दोषियों की याचिका लगाई गई थी, लेकिन पीठ ने रजिस्ट्री विभाग को मुख्य न्यायाधीश के सामने मामले को भेजने को कहा।

पीठ(Bench) ने कहा कि जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए और समय मांगा गया है चूंकि इसके लिए पीठ का गठन करना होगा।

ऐसे में रजिस्ट्री विभाग को मुख्य न्यायाधीश से आदेश लेने को कहा गया है क्योंकि पीठ का समय रविवार को खत्म हो रहा है, ऐसे में पीठ को पुनर्गठित करना होगा।

क्या है पूरा केस

घटना के वक्त बिलकिस बानो की आयु 21 वर्ष थी। उस दौरान बिलकिस 5 महीने की गर्भवती भी थीं। लेकिन गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए। इस दौरान बिलकिस बाने के साथ दुष्कर्म किया गया।

इस मामले में गुजरात सरकार ने सभी दोषियों को 15 अगस्त 2022 को सजा में छूट दे दी थी और उन्हें रिहा कर दिया गया था। इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हम गुजरात सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग करने के आधार पर सजा में छूट के आदेश को रद्द करते हैं।’’

पीठ ने 100 पन्नों से अधिक का फैसला सुनाते हुए कहा कि गुजरात सरकार सजा में छ्रट का आदेश देने के लिए उचित सरकार नहीं है

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